Sunday, 13 November 2011

आवाज़े खल्क नक्कारा ए खुदा होती है..... aadil rasheed / آواز خلق نققرہ خدا ہوتی ہے

आवाज़े खल्क नक्कारा ए खुदा होती है
शेर
talaaq de to rahe ho ghuroor o qehar ke saath
mera shabab bhi lauta do mere mehar ke saath गुरुर ओ  कहर =  घमंड और गुस्सा
तलाक़ दे तो रहे हो गुरूर ओ  कहर  के साथ
मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे महर के साथ
           रेख्ती शायर जनाब सजनी भोपाली


अब आप कहेंगे के  रेख्ती शायर जनाब सजनी भोपाली क्या बला है तो  हुज़ूर रेख्ती कहते हैं उस शायरी को जो औरतों की जुबान यानि औरतो के लहजे मे करी जाए और करने वाला मर्द हो पुराने ज़माने मे मुशायरों मे मर्द औरतों के लिबास मे औरतों की तरह औरतों की जुबान मे शायरी करते थे उसी को उस वक़्त रेख्ती कहा जाता था और अब भी कहा जाता है,
हाँ आज उसकी शक्ल थोड़ी सी बदल गयी है मर्द आज भी औरतो की जुबान मे शेर कहते है और औरतो को वो शेर दे देते है
बस औरतें उस शायरी को उस कविता को उस ग़ज़ल को कवि सम्मेलनों और मुशायरों मे अपने नाम से सिर्फ पढ़ देती है, और वाह वाही लूटती हैं
और ऐसा भी नहीं है के औरतों ने शायरी नहीं की है औरतों ने बहुत उम्दा शायरी की है जिन मे उमराव जान अदा ,साजिदा जैदी जाहिदा जैदी नूर जहाँ सर्वत.हिंद और पाकिस्तान की कई शायरात हैं . कहाँ तक नाम लिखे जाएं ये एक लम्बी फेहरिस्त है अगर सभी के नाम लिखें जाएँ तो कई किताबें वजूद में आ जाएँगी इस पर फिर कभी तफसील से गुफ्तगू होगी  यहाँ  एक शायरा के  नाम का ज़िक्र करना बेहद ज़रूरी है वो  नाम है पकिस्तान की मारूफ शायरा परवीन शाकिर जिनका  नाम शायरात में बड़े एहतराम से लिया जाता है अधिकतर लोग इस "महर" वाले शेर को परवीन शाकिर का समझते हैं  मैं ने कई कवि सम्मेलनों व् मुशायरों मे संचालकों को ये शेर परवीन शाकिर के नाम से ही पढ़ते देखा और सुना है जो के बिलकुल ग़लत है
ये शेर रेख्ती शायर जनाब सजनी भोपाली का है और ये एक शायर का हक है के उसका नाम उसके शेर के साथ  हमेशा लिया जाए और ये हमारा अख्लाकी फ़र्ज़( नैतिक ज़िम्मेदारी ) भी है

ऐसा ही एक शेर है
एक हो जाएँ तो बन सकते है खुर्शीदो मुबीं
वरना इन बिखरे हुए तारों से क्या बात बने
ज़यादातर लोग इसे अल्लामा इकबाल का समझते हैं जब के ये शेर अल्लामा अबुल मुजाहिद जाहिद का है खाकसार की उनसे उनके शागिर्द हामिद अली अख्तर ने मुलाक़ात करायी थी और मरहूम खाकसार से बेहद मुहब्बत भी करते थे
ऐसा ही एक शेर है
वो आये बज़्म में इतना तो मीर ने देखा
फिर उसके बाद चरागों में रौशनी न रही
इस शेर को मीर के नाम से ही जाना जाता है जब के ये शेर सोज़ मुरादाबादी का है


अब हुज़ूर होता क्या है के मुक़र्रीर  या सहाफी किसी शेर को  ग़लत नाम से पढ़ देते हैं और अवाम उसको उसी का समझ लेती है और फिर सीना ब सीना वो बात अवाम में इतनी दूर चली जाती है और अवाम कसरत से उसको उसी तरह बोलने लगती है और आवाज़े खल्क नक्कारा ए खुदा होती है बहुत से ऐसे शब्द (लफ्ज़ )हैं जिनको ग़लत बोला ग़लत लिखा ग़लत पढ़ा जाता है मगर वो सही के बराबर हो जाते हैं और उनको कभी न कभी लुगात (शब्दकोष का बहुवचन ) मे जगह भी  मिल ही जाती है 
aadil rasheed new delhi 22/10/2000


آواز خلق  نققرہ  خدا ہوتی ہے


  
talaaq de to rahe ho ghuroor o qehar ke saath


mera shabab bhi lauta do mere mehar ke saath
طلاق دے تو رہے ہو غرور او قہر کے ساتھ


میرا شباب بھی لوٹا دو میرے مهر کے ساتھ


           ریختی شاعر جناب سجني بھوپالي


اب آپ کہیں گے کے ریختی شاعر جناب سجني بھوپالي کیا بلا ہے تو جناب  ریختی کہتے ہیں اس شاعری کو جو عورتوں کی زبان یعنی اورتو کے لہجے میں کری جائے اور کرنے والا مرد ہو پرانے زمانے میں   مرد شاعرمشاعروںمیں  عورتوں کے لباس میں عورتوں کی طرح عورتوں کی زبان  میں شاعری کرتے تھے اسی کو اس وقت رےكھتي کہا جاتا تھا اور اب بھی کہا جاتا ہے


ہاں آج اس کی شکل تھوڑی سی بدل گئی ہے مرد آج بھی عورتوں  کی زبان  میں شعر  کہتے ہیں اور عورتوں کو وہ شعر دے دیتے ہیں عورتیں  بس  اس شاعری کو اس کویتا  کو اس غزل کو کوی     سملنوں  اور عوامی جلسوں میں اپنے نام سے صرف پڑھ دیتی ہے ، اور واہ واہی لوٹتي ہیں


اور ایسا بھی نہیں ہے کے عورتوں نے شاعری نہیں کی ہے عورتوں نے بہت عمدہ شاعری کی ہے جن میں امرا ؤ جان ادا ، ساجدا زیدی  جاهدا زیدی  نور جہاں سروت. ہند اور پاکستان کی کئی  شاعرہ    ہیں. کہاں تک نام لکھے جائیں یہ ایک لمبی فہرست ہے اگر تمام کے نام لکھیں جائیں تو کئی کتابیں وجود میں آ جائیں گی اس پر پھر کبھی تفصیل سے گفتگو ہوگی یہاں ایک شاعرہ کے نام کا ذکر کرنا بے حد ضروری ہے وہ نام ہے پكستان کی معروف  شاعرہ  پروین شاکر جن کا نام  شاعرہ میں بڑےاحترام  سے لیا جاتا ہے زیادہ تر لوگ اس مہر  والے شعر کو پروین شاکر کا سمجھتے ہیں میں نے کئی مشاعروں کانفرنسوں وںمیں  ناظم مشاعر ہ      کو یہ شعر پروین شاکر کے نام سے ہی پڑھتے دیکھا اور سنا ہے جو کے بالکل غلط ہے


یہ شعر   ریختی  شاعر جناب سجني بھوپالي کا ہے اور یہ ایک شاعر کا حق ہے کے اس کا نام اس کے شعر کے ساتھ ہمیشہ لیا جائے اور یہ ہماری اخلاقی ذمہ داری بھی ہے


ایسا ہی ایک شعر ہے


ایک ہو جائیں تو بن سکتے ہیں خورشید و مبین


ورنہ ان بکھرے ہوئے تاروں سے کیا بات بنے


ذياداتر لوگ اسے علامہ اقبال کا سمجھتے ہیں جب کے یہ شعر علامہ ابو مجاہد زاہد کا ہے خاکسار  کی ان سے ان کے شاگرد عزیز  حامد علی اختر نے ملاقات کرائی تھی اور مرحوم  خاکسار سے بے حد محبت بھی کرتے تھے


ایسا ہی ایک شعر ہے


وہ آئے بذم میں اتنا تو میر نے دیکھا


پھر اس کے بعد چراغوں  میں روشنی نہ رہی


اس شعر کو میر کے نام سے ہی جانا جاتا ہے جب کے یہ شعر سوذ مرادآبادی کا ہے


اب جناب   ہوتا کیا ہے کے مقررير یا صحافی حضرات  کسی شیر کو غلط نام سے پڑھ دیتے ہیںیا لکھ دیتے ہیں  اور عوام اس کو اسی کا سمجھ لیتی ہے اور پھر سینہ بہ سینہ وہ بات عوام میں اتنی دور چلی جاتی ہے اور عوام  اس کو اسی طرح بولنے لگتی ہے اورآواز خلق  نققرہ  خدا ہوتی ہے بہت سے ایسے الفاظ  ہیں جن کو غلط بولا غلط لکھا غلط پڑھا جاتا ہے مگر وہ صحیح کے برابر ہو جاتے ہیں اور ان کو کبھی نہ کبھی لغات  میں جگہ بھی مل ہی جاتی ہے


aadil rasheed new delhi 22/10/2000
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    • Prem Dhingra वाह आदिल भाई क्या बात है इतनी खूबसूरत जानकारी के लिए शुक्रिया
      तलाक दे तो रहे हो गुरूर-ओ-कहर के साथ
      मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेहर के साथ ...क्या बात है '

      about an hour ago · · 1

    • Sushila Shivran ‎"तलाक़ दे तो रहे हो गुरूर ओ कहर के साथ
      मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे महर के साथ "

      आदिल भाई आपने तो एक्दम बेज़ुबान कर दिया ! अललाह-ताला आप पर सदा मेहरबान रहे !

      about an hour ago · · 1

    • Vikas Rana thanks for all the info... rasheed bhayeeee
      about an hour ago · · 1

    • Aadil Rasheed shukriya prem ji mahosya ji vikas jisukriya
      about an hour ago ·

    • Vandana Grover Iss naayaab jaankaari k liye Shukriya..
      about an hour ago · · 1

    • Aadil Rasheed shukriya vandana ji
      59 minutes ago ·

    • Neeraj Angi sallam is shhayri ki gehrayi ko,or sallam gahraayi dikhane vale ko
      52 minutes ago · · 1

    • Aadil Rasheed shukriya neeraj ji
      51 minutes ago ·

    • Syed Shiban Qadri Wah Aadil sahib jawab nahi...bohot he kamaal kiya h aapne es mukhtasar se mazmon me.....es sentence ki Tareef k liye to mere paas alfaaz he nahi hain...

      ہاں آج اس کی شکل تھوڑی سی بدل گئی ہے مرد آج بھی عورتوں کی زبان میں شعر کہتے ہیں اور عورتوں کو وہ شعر دے دیتے ہیں عورتیں ب

      34 minutes ago ·

    • Zafrul Hasnain
      bahot khoob Janab Aadil Rasheed sahab...kya umda andaz se aapne aisi sachchaiyon par se parda uthaya hai jo waqai kisi ko nahi pata the....aur shayarat ke silsile me jo aapne fermaya wo bilkul durust hai ..aaj ke daur me bahot kam shayarat ...See More

      31 minutes ago ·

    • Younus Mohammad salam Rukhsana
      22 minutes ago ·

    • Anand Sharma aadil sahab bhai wah! aapki soch aapka andaz-e-bayaan aur aapki lekhni mashaAllah
      18 minutes ago · · 1

    • Aadil Rasheed shukriya aanad ji aanad aa gaya aap ka comment padh ke aur samay samay par anandit karte rahiyega......aadil rasheed
      16 minutes ago ·

    • Anand Sharma the pleasure is all mine aadil ji.
      12 minutes ago ·

Friday, 11 November 2011

समझ में आएगा इक रोज़ प्यार का मतलब / samajh me aayega ik roz pyar ka matlab..aadil rasheed

समझ में आएगा इक रोज़ प्यार का मतलब
 अभी  तो  सिर्फ  हवास है अभी है प्यार  कहाँ  
मेरा  अपना  मानना  है  के  इंसान  सच्चा  प्यार  अपनी  उम्र  के  आखरी  हिस्से  में  करता  है  यही  वो  उम्र  है  जहाँ  बेटी  बेटे  बहु  सब  उपहास  उड़ाते  है  के  देखो  कैसे  एक  दुसरे  से  प्यार  करते  हैं  .एक  दुसरे  से  पल  भर  दूर  होने  पर  कैसे  तड़पने  लगते  हैं
हकीकत  में  इस  उम्र  में  पति  पत्नी  एक  दुसरे  की  ज़रुरत  नहीं  बलके  एक  दुसरे  का  सहारा  होते  हैं  और  यही  है  सच्चा  प्यार .....आदिल  रशीद
samajh me aayega ik roz pyar ka matlab
abhi to sirf hawas hai abhi hai pyaar kahan 

mera apna maan hai ke insaan sachcha pyar apni umr ke aakhri hisse me karta hai yahi wo umr hai jahan beti bete bahu sab hansi udate hai ke dekho kaise ek doosre se pyar karte hain .ek doosre se pal bhar door hone par kaise taRapne lagte hain
haqeeqt me is umr me pati patni ek doosre ki zaroorat nahin balke ek doosre ka sahara hote hain aur yahi hai sachcha pyar.....aadil rasheed



Friday, 4 November 2011

एक शेर हुस्ने मुजस्सम by aadil rasheed husne mujassam


मैं  ने  जो तेरे शरीर के  एक एक हिस्से पर शेर कहे हैं बालों से शुरू होकर पैर के नाखून तक अगर उन सभी शेरों को एक क्रम में रख दूँ  तो तू नज़र आने लगे ....आदिल रशीद मंसूरी

Wednesday, 2 November 2011

mitti ka tajmahal by aadil rasheed


मेरी शादी २ जून १९९४ को हुई और जब यास्मीन पहली बार देहली उस 10x10 के  कमरे में आयीं तो पता लगा के घर और मकान  में क्या फर्क है 

वादे के मुताबिक मैं उनको लेकर आगरा गया ये तस्वीर उसी वक़्त की हैं

bana raha hai jo "MITTI" ka ek Tajmahal 
hai ek gareeb magar SHAHJAHAN sa lagta hai......aadil rasheed1989

बना रहा है जो "मिटटी" का एक ताजमहल 
है एक गरीब मगर शाहजहाँ सा लगता है आदिल रशीद 1989









सोच जिनकी अपंग होती है....aadil rasheed


दोस्तों काफी वक़्त से आप तक कोई नयी पोस्ट नहीं पहुँच सकी कारण था मेरे सारे ब्लॉग जो इस  id  aadil .rasheed1967 @gmail.com  से  बने  थे  वो डीलीट कर दिए गए है कमाल ये है के मुझे पता चल चुका है के किस ने डीलीट किये हैं उसका आई पी भी पता चल गया है जल्द ही उस पर कानूनी प्रक्रिया की जायेगी 


मैं आभारी हूँ श्री राजीव भरोल का जिन्होंने मेरी सहायता की मेरे जो लेख वहां थे वो सब उन्होंने कैसे कॉपी कर के पहुंचाए ये तो वो ही जान सकते हैं उनका मैदान है वो अमेरिका में ओर्कल मे कार्य करते हैं दक्ष हैं उनकी मदद से मुझे मेरी रचनाएँ मिल गयीं तथा  संसार में अच्छे लोग जियादा हैं इस बात पर मेरा विस्वास और जियादा मज़बूत हुआ है


जिसने डीलीट किये हैं वो कविमना दिमाग से अपाहिज हो चूका है  वो मुझसे और क़ानून से तो बेशक छुप जाए लेकिन अपने ज़मीर से कैसे छुपेगा.उसका ज़मीर उसको आज भी परेशान कर रहा होगा और हर रात सोने से पहले उस से यही सवाल पूछेगा के उसको क्या मिला ऐसा कर के क्यूँ के मुझे तो मेरी सामग्री मिल गई और जो मुझे पढ़ते हैं मुझसे प्रेम करते हैं वो लोग दोबारा फिर मुझ से जुड़ गए हैं और जो रह गए हैं रफ्ता रफ्ता वो भी जुड़ जायेंगे 
लेकिन उस से तो साइबर अपराध हो गया और जिस दिन ये भेद खुलेगा उस दिन वो समाज का सामना कैसे करेगा जिसके सामने वो एक कविमना का मुखोटा लगा कर आता है 


स्टीव जोब्स ने कभी किसी की साईट हैक नहीं की उसने भले छोटी उम्र पाई लेकिन सदियों पर भारी है उसकीउम्र .   रहती दुनिया तक लोग उसको याद करेंगे  कम से कम उस को स्टीव जोब्स की  जीवनी एक बार तो "दिल से " पढनी चाहिए 
कमाल (नीचता)की हद ये है के वो इस कायरता को अपने चमचों चम्चियों में बड़े फख्र से बताते भी होंगे के देखो मैं ने उसका ब्लॉग हैक कर दिया उसकी साईट हैक कर दी/डीलीट कर दी इस पर मैं तो एक बात कहता हूँ के 
"किसी को धोका देने के बाद ये नहीं सोचना चाहिए के आप चालाक कितने हैं बल्कि ये सोचना चाहिए के धोका खाने वाला आप पर कितना यकीन करता था"
आप इस बात का चर्चा करके अपनी महानता नहीं कायरता का बखान कर रहे हो  
 मुझे अपने करम फरमा मरहूम (स्वर्गीय) अहमद कमाल परवाज़ी का ये मतला आज बहुत याद आया 


जो ज़ख्म दे गए उन्हें गहरा तो मत करो
हम बेवकूफ हैं कहीं चर्चा तो मत करो


और अपने बहुत पुराने शेर आज बहुत याद आये 


 सोच जिनकी अपंग होती है 
 ऐसे लोगों का कुछ इलाज नहीं


अपाहिज सोच के मालिक हैं जितने 
उन्हें कुछ भी कहो मानव न कहना 


ऐसे अफाहिज सोच के लोगों को अगर आप सच बताना भी चाहो, समझाना भी चाहो तो वो सच स्वीकार नहीं करते बलके हक बयानी (सच बोलना) करने वालों को लिस्ट से ही डीलीट कर देते हैं 
उनके लिए मैं ने एक शेर कहा था 
ख्याल रखना ज़रा सी भी हकबयानी की
वो अपनी लिस्ट से तुमको डीलीट कर देगा 



मैं उसे मुज़फ्फर हनफी का ये शेर भी नहीं सुनाऊंगा

''आइना खाने मेरा चेहरा मुझे वापस कर 
वरना मैं हाथ बढ़ा सकता हूँ पत्थर की तरफ,,


क्यूँ के मैं अपनी ही किसी चीज़ को भीक में नहीं मांग  सकता हाँ कानून की शरण में ज़रूर जाऊंगा और जब वो मेरे ब्लॉग वापस कर देगा उसके बाद भी मैं उस पर कभी लिखूंगा कुछ नहीं लेकिन उससे ब्लॉग वापस ज़रूर लूँगा चाहें उस के लिए कितनी ही दूर क्यूँ न जाना पड़े क्यूँ के अब ये लड़ाई सत्य और असत्य की है सत्य असत्य की लड़ाई में सत्य सदा से ही असत्य को बेनकाब करता आया है मुझे विश्वास है यहाँ भी सत्य ही विजयी होगा.

दोस्तों आप लोगों का प्यार ही मेरी शक्ति है
और जो लोग तकनीकी रूप से निपुण हैं उनको लिखना चाहिए के कैसे हम अपने ब्लॉग को सुरक्षित कर सकते हैं 
अंत में एक बार फिर आपको कष्ट के लिए खेद  
सत्यमेव जयते 
आदिल रशीद 

Monday, 31 October 2011

aadil rasheed jashn e aazadi ke mushaire men

naye puraane charagh aadil rasheed

Prof waseem barelvi aur aadil rasheed ek mushaire men

aadil rasheed ke samman men kavi goshti aur mushaira

mashoor naqid (aalochak)aur shair muzaffar hanfi ke saath aadil rasheed

prof waseem barelvi,makhmoor saeedi ke saath aadil rasheed


मख़मूर सईदी प्रो वसीम बरेलवी के साथ/आदिल रशीद

munawwar rane ke saath aadil rasheed mushaire ke bad khush gawar lamhon men

 मुनव्वर राना और आदिल रशीद एक कवि सम्मलेन में फुर्सत में

munaawar rana aadil rasheed

मुनव्वर राना आदिल रशीद एक कार्यक्रम में

munawwar rana anwar baari aadil rasheed



शहबाज़ नदीम,मुनव्वर राना,अनवर बारी और आदिल रशीद जशने आज़ादी  दिल्ली   उर्दू  अकादमी 


ek puraani tasveer /aadil rasheed-1992,

ek puraani tasveer 1986/aadil rasheed